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सौदागर


फरमान था उसकामेरा अरमान थोड़ी थासौदे जैसा जीवनवरदान थोड़ी था

मुझी को क्यों मिलामाँगा भी नहीं थानादान था मैं शायदवो सौदागर बड़ा था।

मं शर्मा (रज़ा)

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