फरमान था उसकामेरा अरमान थोड़ी थासौदे जैसा जीवनवरदान थोड़ी थामुझी को क्यों मिलामाँगा भी नहीं थानादान था मैं शायदवो सौदागर बड़ा था।मं शर्मा (रज़ा)
फरमान था उसकामेरा अरमान थोड़ी थासौदे जैसा जीवनवरदान थोड़ी था
मुझी को क्यों मिलामाँगा भी नहीं थानादान था मैं शायदवो सौदागर बड़ा था।
मं शर्मा (रज़ा)