रंजिशें पालता रहाबदस्तूर निभाता रहासुकून भी मिला नहींबेवजह परेशान रहाशत्रु शायद कोई था नहींखुद को तलाशा नहींजिस तिस को मानता रहाताउम्र भ्रम को जीता रहा ।मं शर्मा (रज़ा)
रंजिशें पालता रहाबदस्तूर निभाता रहासुकून भी मिला नहींबेवजह परेशान रहा
शत्रु शायद कोई था नहींखुद को तलाशा नहींजिस तिस को मानता रहाताउम्र भ्रम को जीता रहा ।
मं शर्मा (रज़ा)