मन में जलनजिह्वा पे दंशह्रदय में विषलिए फिरते होसर्प हो सर्पबन कर डसोसाधु बन करक्यों फिरते हो।मं शर्मा (रज़ा
मन में जलनजिह्वा पे दंशह्रदय में विषलिए फिरते हो
सर्प हो सर्पबन कर डसोसाधु बन करक्यों फिरते हो।
मं शर्मा (रज़ा