Poetry 1 min read 615.9K reads

शर्मिंदा


तुमसे कोई शिकायत नहीं थीअपने आप से ही शर्मिंदा हुआ हूँयकीं खुद पर भी बाकी नहीं अबतुम पर ऐतबार नहीं कर सका हूँ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more