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शरण


तेरी शरण में पहले आना थापहुँचने में थोड़ी देर लगीशीश तेरे दर पे झुकाना थाझुकने में थोड़ी देर लगी

गुरूर को पहले मिटाना थासमझने में थोड़ी देर लगीसूरज का तो बहाना थाआँख खुलने में थोड़ी देर लगी।

मं शर्मा (रज़ा)

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