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सपने सुनहरे


कुछ तेरे थेकुछ मेरे थेमिल कर बुनेसपने सुनहरे थे

कुछ बिखरेकुछ टूट गएकुछ छल गएसच से डरे डरे से थे।

मं शर्मा(रज़ा)

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