इनके वादों से
इतने दावों से
कितना घबराया हूँ
बताऊँ कैसे
इनकी सांत्वनाओं से
इनके मुआवजों से
फट गई है झोली
घर जाऊँ कैसे
क्या इतना गरीब था
इतना मजबूर था
जितना बता गए हैं
यकीन लाऊँ कैसे
गरीबी भगा के रहेंगे
न्याय करके दम लेंगे
कलियुगी देवों के
झांसे से बच पाऊँ कैसे ।
मं शर्मा( रज़ा)
