कल शांति के दूत आकरसंतोष का पाठ पढ़ा गएमजबूरी की रजामंदीअभावों से संधि करा गएअब क्रोध नहीं साल रहाअब रक्त नहीं खौल रहाअब वह केवल बह रहा हैहर हाल में जीओ कह रहा है।मं शर्मा (रज़ा)
कल शांति के दूत आकरसंतोष का पाठ पढ़ा गएमजबूरी की रजामंदीअभावों से संधि करा गए
अब क्रोध नहीं साल रहाअब रक्त नहीं खौल रहाअब वह केवल बह रहा हैहर हाल में जीओ कह रहा है।
मं शर्मा (रज़ा)