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Sanskaar


मानवता का मोल न समझेंभौतिकता की होड़ सी हैसंस्कार वही पुराने हैंपीढ़ी बदली बदली सी है

ममता संग स्नेह बिलखतापरिवारों में बिखरन सी हैअधिकारों की बात करें सबकर्त्तव्यों में कमी सी है ।

मं शर्मा( रज़ा)

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