छल कपट में आकंठ डूबा
स्वार्थ के रंग में रंगा हुआ
षडयंत्रों की साजिश करता
मुखौटों की नुमाइश जैसा
क्या यही तेरा शाहकार है
क्या इसी का नाम संसार है ।
मं शर्मा (रज़ा)


छल कपट में आकंठ डूबा
स्वार्थ के रंग में रंगा हुआ
षडयंत्रों की साजिश करता
मुखौटों की नुमाइश जैसा
क्या यही तेरा शाहकार है
क्या इसी का नाम संसार है ।
मं शर्मा (रज़ा)