Poetry 1 min read 574.2K reads

संसाधन


धरती माता करे गुहारकर दो मेरा भी उपचारजैसे पहले थी गुलज़ारकर दो वैसी फिर एकबार

एकदूजे का ख्याल करें हमक्यों धरा का अपमान करें हमसीमित संसाधन हैं पृथ्वी परक्यों न इनका संवर्धन करें हम।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more