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संकीर्ण


ये मैं हूँ सोच सोचकरपरेशान हो गया हूँदेखकर आईने में खुदकोआज हैरान हुआ हूँ

संकीर्ण हुई सोच मेरीअहसास का अभाव हैइंसान बनके आया थामशीन हो के रह गया हूँ।

मं शर्मा (रज़ा)

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