तुम ही जान सके हो मन कीतुम ही हर सकते हो तन कीसिर्फ तुम ही रह जाओ मन मंदिर मेंचाह नहीं किसी और संग की ।मं शर्मा( रज़ा)
तुम ही जान सके हो मन कीतुम ही हर सकते हो तन कीसिर्फ तुम ही रह जाओ मन मंदिर मेंचाह नहीं किसी और संग की ।
मं शर्मा( रज़ा)