कभी सुनहरी भोर सीकभी सुरमयी संध्या सीजिंदगी तुम जीवन भरनए नए रूप धरती रहीतेरे रंग में ना रंग सकातुझसा कभी न हो सकाअपने वजूद को भरमानेसुबह को शाम न कह सका।मं शर्मा (रज़ा)
कभी सुनहरी भोर सीकभी सुरमयी संध्या सीजिंदगी तुम जीवन भरनए नए रूप धरती रही
तेरे रंग में ना रंग सकातुझसा कभी न हो सकाअपने वजूद को भरमानेसुबह को शाम न कह सका।
मं शर्मा (रज़ा)