अकेला हूँ कि समूह हूँपथिक हूँ पथिक रहूँराह पर अग्रसर रहूँमंजिल की राह चलूँजीत हो कि हार होपतझड़ हो कि बहार होमान हो कि तिरस्कार होआगे बढ़ना सरोकार हो।मं शर्मा (रज़ा)
अकेला हूँ कि समूह हूँपथिक हूँ पथिक रहूँराह पर अग्रसर रहूँमंजिल की राह चलूँ
जीत हो कि हार होपतझड़ हो कि बहार होमान हो कि तिरस्कार होआगे बढ़ना सरोकार हो।
मं शर्मा (रज़ा)