अभिलाषाओं की प्यास मेंसफलताओं की आस मेंजीवन को मत दंडित करोअति उत्साहित उल्लास मेंसाँसों के विशुद्ध प्रवाह कोप्रकृति के अंतर्दाह कोइतना भी अनसुना न करोदूषित हवाओं के विलाप को।मं शर्मा (रज़ा)
अभिलाषाओं की प्यास मेंसफलताओं की आस मेंजीवन को मत दंडित करोअति उत्साहित उल्लास में
साँसों के विशुद्ध प्रवाह कोप्रकृति के अंतर्दाह कोइतना भी अनसुना न करोदूषित हवाओं के विलाप को।
मं शर्मा (रज़ा)