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संपूर्ण


संपूर्ण जगत का ध्यान है तुझकोहर एक विधा का ज्ञान है तुझकोतू सबका निगहबान है फिर क्योंकहता नहीं तूही भगवान है सबको।

मं शर्मा (रज़ा)

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