साल दर साल गुजरते गएएक लम्हा सालों बाद नहीं गुजरापतझड़ बनके ठहरा जीवन मेंबहार आने पर भी नहीं गुजरा।मं शर्मा (रज़ा)
साल दर साल गुजरते गएएक लम्हा सालों बाद नहीं गुजरापतझड़ बनके ठहरा जीवन मेंबहार आने पर भी नहीं गुजरा।
मं शर्मा (रज़ा)