वक्त की सखावत हैदर्द की किताबत हैतुमसे न पढ़ी जाएगीअश्रुओं की इबारत है ।मं शर्मा (रज़ा)
वक्त की सखावत हैदर्द की किताबत हैतुमसे न पढ़ी जाएगीअश्रुओं की इबारत है ।
मं शर्मा (रज़ा)