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सजग


लक्ष्य कठिन हैराह निर्जनमन आकुलतू सजग बन

योद्धा है तूजीवन समर काचिर प्रहरी बनभूल कर थकन

ह्रदय में आगभीगे हों नयनहर लेगा पीड़ाजीत का घन ।

मं शर्मा (रज़ा)

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