बिन बदरा बरसात हुई कलजाने किसकी हूक दे गई सुनाईशायद फिर दिल टूटा किसी काबिन बारात गूँज उठी शहनाई।मं शर्मा (रज़ा)
बिन बदरा बरसात हुई कलजाने किसकी हूक दे गई सुनाईशायद फिर दिल टूटा किसी काबिन बारात गूँज उठी शहनाई।
मं शर्मा (रज़ा)