चित उसकी पट भी उसकीहार-जीत सब निराधार हैउसकी शह ही दे रही मातक्या जीत और क्या हार है।मं शर्मा( रज़ा)
चित उसकी पट भी उसकीहार-जीत सब निराधार हैउसकी शह ही दे रही मातक्या जीत और क्या हार है।
मं शर्मा( रज़ा)