मेरे आने कीबाट जोहतेसबके मनप्रसन्न हो उठतेप्रकृति कोमैं ही सजाताफूलों केमेले लगाताऋतुओं कासरताज हूँमैं बसंतॠतुराज हूँ।मं शर्मा (रज़ा)
मेरे आने कीबाट जोहतेसबके मनप्रसन्न हो उठते
प्रकृति कोमैं ही सजाताफूलों केमेले लगाता
ऋतुओं कासरताज हूँमैं बसंतॠतुराज हूँ।मं शर्मा (रज़ा)