बड़े दिनों तकबेरोज़गार फिरा जोउस दिल कोनया रोज़गार मिला हैख्यालों में खोने काख्वाब बुनने काउलझनें पालने काकारोबार मिला है ।मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित
बड़े दिनों तकबेरोज़गार फिरा जोउस दिल कोनया रोज़गार मिला है
ख्यालों में खोने काख्वाब बुनने काउलझनें पालने काकारोबार मिला है ।
मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित