शर भी चुके नहींलक्ष्य से चूके नहींसीना छलनी हुआहौसले टूटे नहींवर्षा थमी नहींमृगतृष्णा मिटी नहींजीवन का सूखा मिटातेनेत्र भी रीते नहीं।मं शर्मा (रज़ा)
शर भी चुके नहींलक्ष्य से चूके नहींसीना छलनी हुआहौसले टूटे नहीं
वर्षा थमी नहींमृगतृष्णा मिटी नहींजीवन का सूखा मिटातेनेत्र भी रीते नहीं।
मं शर्मा (रज़ा)