कितने चेहरे दिखते हैंआते जाते राहों मेंयाद कहाँ सब रहते हैंभूली बिसरी यादों मेंगर कभी तुम दिख जाओइन अजनबी सी राहों मेंझट से तुम्हें पहचान लेंगेपल भर की मुलाकातों में।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
कितने चेहरे दिखते हैंआते जाते राहों मेंयाद कहाँ सब रहते हैंभूली बिसरी यादों में
गर कभी तुम दिख जाओइन अजनबी सी राहों मेंझट से तुम्हें पहचान लेंगेपल भर की मुलाकातों में।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित