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रघुबर


थे दर-बदरमेरे रघुबरबड़े दिनों मेंआज घर आए हैं

पुष्प चढ़ाओदीप जलाओराम में रम जाओप्रभु राम आए हैं।

मं शर्मा (रज़ा)

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