पुस्तकें हैं सच्ची साथीघर बैठे दुनिया घुमातीज्ञान का भंडार पुस्तकेंमनोरंजन का बाज़ार हैंअकेलेपन की हैं साथीसदा सर्वदा मितभाषी हैंकुछ कल की कुछ आज कीजग बीती बताती हैं।मं शर्मा( रज़ा)
पुस्तकें हैं सच्ची साथीघर बैठे दुनिया घुमातीज्ञान का भंडार पुस्तकेंमनोरंजन का बाज़ार हैं
अकेलेपन की हैं साथीसदा सर्वदा मितभाषी हैंकुछ कल की कुछ आज कीजग बीती बताती हैं।
मं शर्मा( रज़ा)