Poetry 1 min read 575.6K reads

पुस्तकें


पुस्तकें हैं सच्ची साथीघर बैठे दुनिया घुमातीज्ञान का भंडार पुस्तकेंमनोरंजन का बाज़ार हैं

अकेलेपन की हैं साथीसदा सर्वदा मितभाषी हैंकुछ कल की कुछ आज कीजग बीती बताती हैं।

मं शर्मा( रज़ा)

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