Poetry 1 min read 618.2K reads

पूज्यनीय


स्नेह स्पर्श सेज़ख्म भर देसीने से लगा करपीड़ा हर ले

खुशनसीब हममाँ को पाकरहुए पूज्यनीय तुममाँ को देकर ।

मं शर्मा(रज़ा)

Read more Earn more Learn more