स्नेह स्पर्श सेज़ख्म भर देसीने से लगा करपीड़ा हर लेखुशनसीब हममाँ को पाकरहुए पूज्यनीय तुममाँ को देकर ।मं शर्मा(रज़ा)
स्नेह स्पर्श सेज़ख्म भर देसीने से लगा करपीड़ा हर ले
खुशनसीब हममाँ को पाकरहुए पूज्यनीय तुममाँ को देकर ।
मं शर्मा(रज़ा)