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प्रेम व्यापार


विश्वास हुआ कमजोर हैअनिश्चितता का दौर हैशब्द अपनी मर्यादा भूलेसंवाद हुआ मुँहजोर है

सही गलत में फर्क मिटेये कोशिशें पुरजोर हैंप्रेम एक व्यापार हुआ हैचर्चा यही हर ओर है।

मं शर्मा( रज़ा)

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