अधर खामोश थेमैं मौन रहादर्द मुखर थाजाहिर हो गयादर्द की गूँज गहरी थीफिर भी प्रत्युत्तर न मिलामौन ने खामोश रहकरदर्द को शांत किया ।मं शर्मा (रज़ा)
अधर खामोश थेमैं मौन रहादर्द मुखर थाजाहिर हो गया
दर्द की गूँज गहरी थीफिर भी प्रत्युत्तर न मिलामौन ने खामोश रहकरदर्द को शांत किया ।
मं शर्मा (रज़ा)