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प्रतीक्षारत


नदी सागर से मिलने बेकरार हैमेघ को बरसने का इंतज़ार हैप्रेमी की तड़प चाँद का दीदार हैपरिंदों को भोर का इंतज़ार हैवसंत को चमन करना गुलज़ार हैसर्वत्रव्याप्त प्रतीक्षा का अंबार हैजीवन एक प्रतीक्षारत इंतज़ार है।

मं शर्मा (रज़ा)

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