सुख के क्षणों के

दुख के पलों के

नित नए नए पन्ने

जोड़े भी जाएँगे


पढ़े न जाएं चाहे

सुने ना जाएं

पन्ने जीवन के

प्रश्न तो उठाएंगे।



मं शर्मा (रज़ा)