Poetry 1 min read 134.4K reads

प्रसन्नता


बाद पतझड़ केबहारों को आना थामन वासंती मेंखुशियों का खजाना था

नफरत की खेती मेंएक गुल खिलाना थाभेजी दुआओं कासिला तो पाना था।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more