हवाओं में घुल गया है दर्द मेराफिज़ा खुद मुझको बयां करेगीदर्द में मुस्कुराना भी एक हुनर हैजिंदगी मेरी हस्ती को सलाम करेगी।मं शर्मा (रज़ा)
हवाओं में घुल गया है दर्द मेराफिज़ा खुद मुझको बयां करेगीदर्द में मुस्कुराना भी एक हुनर हैजिंदगी मेरी हस्ती को सलाम करेगी।
मं शर्मा (रज़ा)