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फिदा


समझ कभी आई नहींतू पहेली सी गहराई हैतेरी अदा सबसे जुदा हैजिंदगी दिल तुझपे फिदा हैकितना भी नाराज़ रहूँहरदम माँगी तेरी दुआ है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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