वतन की गोद में पलामैं वतन का लाडलावतन पे फिदा था मैंवतन ही पर मर मिटावतन का कर्ज़ था मुझपेवो सर से उतार दियाफख्र से सिर ऊँचा करमैं वतन से चला गया।मं शर्मा (रज़ा)
वतन की गोद में पलामैं वतन का लाडलावतन पे फिदा था मैंवतन ही पर मर मिटा
वतन का कर्ज़ था मुझपेवो सर से उतार दियाफख्र से सिर ऊँचा करमैं वतन से चला गया।
मं शर्मा (रज़ा)