फासले हैं दरम्यांआवाज़ तो आती हैधुंधली सी ही सहीयाद तो बाकी हैदूर हुआ है आसमांपरवाज़ तो आती हैमिट गए अल्फाज़अहसास तो बाकी हैखत्म हुई बरसातप्यास तो बाकी हैचुक गई हयातआगाज़ तो बाकी है ।मं शर्मा (रज़ा)
फासले हैं दरम्यांआवाज़ तो आती हैधुंधली सी ही सहीयाद तो बाकी है
दूर हुआ है आसमांपरवाज़ तो आती हैमिट गए अल्फाज़अहसास तो बाकी है
खत्म हुई बरसातप्यास तो बाकी हैचुक गई हयातआगाज़ तो बाकी है ।
मं शर्मा (रज़ा)