ज़मीं की फरियाद उस तकपहुँची नहीं शायदफलक ने आज फिरकहर बरपाया हैजन्मों से निहार रही हैउसी को एकटकफिर भी चाँद कहाँज़मीं पर उतर पाया है।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
ज़मीं की फरियाद उस तकपहुँची नहीं शायदफलक ने आज फिरकहर बरपाया है
जन्मों से निहार रही हैउसी को एकटकफिर भी चाँद कहाँज़मीं पर उतर पाया है।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित