तरस न खा मेरे हाल परमैं मज़े में हूँमुझे आदत है यूँ भीदर्द में मुस्कुराने कीथोड़ी सी बस हवा और देफना हो जाऊँगाकौन था मैं कहाँ थामैं भी न जान पाऊँगा ।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
तरस न खा मेरे हाल परमैं मज़े में हूँमुझे आदत है यूँ भीदर्द में मुस्कुराने की
थोड़ी सी बस हवा और देफना हो जाऊँगाकौन था मैं कहाँ थामैं भी न जान पाऊँगा ।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित