भीगी उमंगों केदिन हैं रंगों केमौसम राग कामहीना ये फाग कातन मन भिगो लेखुशियों में डूबलेबड़े दिनों में आया हैदिन मेल मिलाप काढोल ताशे मंजीरेतोड़के सब ज़जीरेंआज भर तो जी लेउत्सव उन्माद का।मं शर्मा (रज़ा)
भीगी उमंगों केदिन हैं रंगों केमौसम राग कामहीना ये फाग का
तन मन भिगो लेखुशियों में डूबलेबड़े दिनों में आया हैदिन मेल मिलाप का
ढोल ताशे मंजीरेतोड़के सब ज़जीरेंआज भर तो जी लेउत्सव उन्माद का।
मं शर्मा (रज़ा)