Poetry 1 min read 77K reads

पेड़


नित निहारा करता है पेड़भूख को उड़ानें भरते हुएखिलता मन देख कोटरों मेंनौनिहालों को चहकते हुए

चिलचिलाती धूप में जबसाया भी साथ चलता नहींफर्ज है मेरा आश्रय देनापेड़ मानता है जताता नहीं।

मं शर्मा (रज़ा)

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