छोटे छोटे गम थेथोड़े थोड़े बाँट लिएसाझे की खुशियाँ थीमिलजुल कर बढ़ा लींराह भर धूप थीहथेलियों से छाँव कीमंजिल पर पहुँच करपथिक की साँस ली ।मं शर्मा (रज़ा)
छोटे छोटे गम थेथोड़े थोड़े बाँट लिएसाझे की खुशियाँ थीमिलजुल कर बढ़ा लीं
राह भर धूप थीहथेलियों से छाँव कीमंजिल पर पहुँच करपथिक की साँस ली ।
मं शर्मा (रज़ा)