फूल हो कि शूल होपाँव जमाने में न भूल होरथ हो कि पैदल पथ होलक्ष्य से न कभी विमुख होसुपथ हो कि कुपथ होपथ का उद्देश्य स्पष्ट होआएँ कितने व्यवधान चाहेपथिक पूर्णतःआश्वस्त हो।मं शर्मा (रज़ा)
फूल हो कि शूल होपाँव जमाने में न भूल होरथ हो कि पैदल पथ होलक्ष्य से न कभी विमुख हो
सुपथ हो कि कुपथ होपथ का उद्देश्य स्पष्ट होआएँ कितने व्यवधान चाहेपथिक पूर्णतःआश्वस्त हो।
मं शर्मा (रज़ा)