जिंदगी की पाठशाला उम्रभर चलती रहीहम ही जल्दी पढ़ना लिखना छोड़ बैठे ।मं शर्मा (रज़ा)
जिंदगी की पाठशाला उम्रभर चलती रहीहम ही जल्दी पढ़ना लिखना छोड़ बैठे ।
मं शर्मा (रज़ा)