तुम धीरजतुम सहजतुम सलजहा नारी तूअग्रणी क्यों न हुईतुम शालिनीतुम मनभाविनीतुम धारिणीहा नारी तूपूज्या क्यों न हुईतुम प्रतीक्षातुम उपेक्षातुम परीक्षाहा नारी तूपाषाण क्यों न हुई।मं शर्मा (रज़ा)
तुम धीरजतुम सहजतुम सलजहा नारी तूअग्रणी क्यों न हुई
तुम शालिनीतुम मनभाविनीतुम धारिणीहा नारी तूपूज्या क्यों न हुई
तुम प्रतीक्षातुम उपेक्षातुम परीक्षाहा नारी तूपाषाण क्यों न हुई।
मं शर्मा (रज़ा)