सूरज को उगते देखाशाम को ढलते देखारात को महफूज़ करनींदों को उड़ते देखासृष्टि के इस चक्र कोजीवन के इस पर्व कोनित नई उमंग सेरोज़ मनते देखा।मं शर्मा (रज़ा)
सूरज को उगते देखाशाम को ढलते देखारात को महफूज़ करनींदों को उड़ते देखा
सृष्टि के इस चक्र कोजीवन के इस पर्व कोनित नई उमंग सेरोज़ मनते देखा।
मं शर्मा (रज़ा)