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परिंदे


बच्चों का मासूम बचपन छूटागली मुहल्ले का खेलकूद छूटासोना जागना उठना बैठना छूटाअपनों संगमिलना जुलना छूटा

तन का होश न अपनों की चिंतामोबाइल की लत ने डाला फंदाआजाद परिंदे थे जो कल तकआज घरों में अपने ही कैद हुए ।

मं शर्मा( रज़ा)

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