Poetry 1 min read 580.3K reads

परिंदग़ी


आसमान अनहद थापरवाज़ कम पड़ गईफलक के पार जाना थापरिंदगी कम पड़ गईहौसले बेशुमार थेजिंदगी कम पड़ गई।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more