मुश्किलों का आना जाना था

इम्तिहानों की बेजां आजमाइश थी

संघर्षों से परिचय पुराना था

सुसंचालन की झूठी नुमाइश थी


सत्य वचनों पर जुर्माना था

झूठों की रोज फरमाइश थी

जो ढल न सका इन साँचों में

उसने भारी कीमत चुकाई थी।



मं शर्मा (रज़ा)

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